Cough Syrup New Rule: अक्सर हल्की खांसी, जुकाम या गले में खराश होने पर हम डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे किसी भी मेडिकल स्टोर का रुख करते हैं और अपनी मर्जी से कोई भी कफ सिरप खरीद लेते हैं। भारत में बिना पर्ची के दवाएं खरीदना एक आम बात रही है। लेकिन, अब आपको अपनी यह पुरानी आदत तुरंत बदलनी होगी। अगर आप अब बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी भी तरह का सिरप खरीदने जाते हैं, तो आपको मेडिकल स्टोर से खाली हाथ लौटना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने एक ऐसा चौंकाने वाला और सख्त फैसला लिया है, जिसने देश भर के दवा कारोबारियों और आम जनता को अलर्ट कर दिया है। सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि सरकार को कफ सिरप की खुलेआम बिक्री पर इतनी बड़ी पाबंदी लगानी पड़ी? खौफनाक है पाबंदी के पीछे की वजह इस बड़े और ऐतिहासिक फैसले की जड़ें पिछले साल घटी एक बेहद दर्दनाक त्रासदी से जुड़ी हैं। पिछले साल अक्टूबर के महीने में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान से कुछ ऐसी मनहूस खबरें सामने आईं, जिन्होंने हर माता-पिता को खौफ में डाल दिया था। वहां कफ सिरप का सेवन करने से कई मासूम बच्चों की तड़प-तड़प कर जान चली गई थी। मेडिकल जांच में यह डरावना सच सामने आया कि दवा पीने के बाद बच्चों की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था (किडनी फेलियर), जो अंततः उनकी मौत का मुख्य कारण बना। https://twitter.com/ANI/status/2066747251381375226 दवा की बोतल में छिपा था जहर मासूमों की मौतों के बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) तुरंत हरकत में आया। जब इन संदिग्ध कफ सिरपों की लैब में गहन जांच की गई, तो वैज्ञानिकों के भी होश उड़ गए। जांच रिपोर्ट में यह भयानक खुलासा हुआ कि सिरप के अंदर 'डायथिलीन ग्लाइकॉल' (DEG) नाम के एक बेहद खतरनाक केमिकल की मात्रा 48% से भी अधिक थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि इंसानी शरीर के लिए इस केमिकल की स्वीकार्य सीमा महज 0.1% है। यानी, इलाज के नाम पर बच्चों को जो सिरप दिया जा रहा था, वह असल में एक धीमा जहर था। क्या कहता है सरकार का नया नोटिफिकेशन? मासूमों की जान से हो रहे इस सीधे खिलवाड़ को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार, 16 जून को मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए नोटिफिकेशन ने सिरप की 'ओवर-द-काउंटर' (बिना पर्ची की बिक्री) के युग पर हमेशा के लिए ब्रेक लगा दिया है। इस नए नियम की मुख्य बातें पर्ची हुई अनिवार्य: अब देश के किसी भी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप या कोई अन्य ओरल लिक्विड सिरप खरीदने के लिए एक रजिस्टर्ड डॉक्टर का 'प्रिस्क्रिप्शन' (पर्ची) दिखाना पूरी तरह से अनिवार्य होगा। कानून में बड़ा बदलाव: सरकार ने यह बदलाव 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में 'ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026' के माध्यम से किया है। जानकारी के मुताबिक, इस कड़े संशोधन को 9 जून को ही सरकारी गजट में नोटिफाई कर दिया गया था। 'शेड्यूल-के' (Schedule-K) से बाहर: पहले सिरप-बेस्ड दवाओं को 'शेड्यूल-के' की लिस्ट में रखा जाता था, जिससे इन्हें बनाने और बिना पर्ची बेचने की विशेष छूट मिलती थी। अब सिरप को इस छूट वाली सूची से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की मंजूरी नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला रातों-रात हवा में नहीं लिया गया। केंद्र सरकार ने इस गंभीर मसले पर जनता और विशेषज्ञों की आपत्तियों और सुझावों की बारीकी से समीक्षा की। इसके बाद 'ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' (DTAB) जैसे शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लंबा विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों की हरी झंडी मिलने के बाद ही इस बदलाव को अंतिम रूप दिया गया है। बाजार और आम जनता पर क्या होगा असर? इस नियम के लागू होने के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों को अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव करना होगा। बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप बेचने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आम जनता को भी अब 'सेल्फ-मेडिकेशन' (खुद अपना इलाज करने) की खतरनाक आदत से बचना होगा। यह नया नियम भले ही लोगों को सिरप खरीदने में थोड़ी असुविधाजनक लगे, लेकिन यह सीधे तौर पर आम जनमानस की सुरक्षा से जुड़ा है। सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की जान के साथ कोई भी लापरवाही अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ये भी पढ़ें: भारत में टेलीग्राम पर रोक! NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा फैसला